आलेखन कला/चित्रकला जब में सभी स्थानों पर जब रंग भर दिया जाता है तो उसके बाद अब आलेखन के आकारों की रेखाएं खींचनी चाहिए। इन रेखाओं को खींचते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि यह रेखाएं लयबद्ध और बारीक खींची हो, जब ये रेखाएं लयबद्ध और बारीक खींची होंगी तो आलेखन सुंदर और आकर्षक दिखाई देगा। आलेखन के आकार की रेखाओं को खींचते समय यह ध्यान देना चाहिए कि जब रेखा को खींचा जाए तो बिना रुके हुए संपूर्ण आकार की रेखा खींच दी जाए और बीच में यह रेखाएं टूटे ना।
यदि रंग समाप्त हो जाने के कारण यह आलेखन के आकार की रेखाएं खींचते समय बीच में ही रुकना पड़े तो उस रेखा को वहीं से आगे बढ़ाते हुए खींचना चाहिए और उसको इस प्रकार खींचना चाहिए की जोड़ का पता ना लग सके। जहां पर जोड़ बन रहा हो, वहां पर इस प्रकार रेखा खींची जाए कि वे दोनों एक ही आकार की दिखाई दें और आपस में उनकी मोटाई मिल जाए।
आलेखन के अनुसार जो बाह्य रेखाएं बनाई जाती हैं उनको आकृति की रंग को गहरा करके लगाएं। आलेखन के बाह्य रेखाओं को खींचते समय सदा ध्यान देना चाहिए कि जिस ब्रश का प्रयोग आप कर रहे हो वह 0 नंबर का हो।
चित्रकला की बाह्य रेखाएं खींचते समय सावधनियाँ और नियम -:
1) आलेखन के बाहर की रेखाओं को खींचते समय सदैव 0 नंबर के ब्रश का प्रयोग करना चाहिए।
2) आलेखन की बाह्य रेखाओं को खींचते समय गहरे रंगों का प्रयोग, बाह्य रेखा में करना चाहिए।
3) बाह्य रेखा खींचते समय जहां पर जोड़ हो वहाँ की रेखाओं को उनकी मोटाई में भली-भांति आपस में मिला देना चाहिए, जिससे जोड़ का पता न लगे।
4) सदैव प्रयास करना चाहिए कि आलेखन की बाह्य रेखाएं एक ही बार में पूरी तरह से खींची जा सके। क्योंकि दो बार में बाह्य रेखा को खींचने पर जोड़ बन जाने की संभावना होती है।
5) आलेखन के बाह्य रेखाओं को खींचते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि यह रेखाएं लयबद्ध और बारीक खींची जाएं।