रेशम के बारे में जानकारी (Silk in Hindi) -:
ऐसा माना जाता है कि रेशम की खोज लगभग 4000 वर्ष पूर्व चीन में हुआ था। रेशम के तंतु को रेशम कीट कोकून से खींचकर निकाला जाता है। रेशम के रेशे बहुत ही मजबूत चमकदार और चिकने होते हैं, यह इतने लचीले व चिकने होते हैं कि इन पर धूल नहीं टिकती है। इन कपड़ों पर झूला कितने करने के कारण यह कपड़े बहुत ही आसानी से साफ हो जाते हैं और गंदे नहीं होते हैं।
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| रेशम किट |
रेशम कीड़े को Bombyx Mori के नाम से भी जाना जाता है। रेशम के कीड़ों के अंडों से लारवा निकलते हैं। इन लारवा को एक विशेष प्रकार के बर्तन में रखा जाता है तथा इन्हें शहतूत की पत्तीयां खिलाई जाती हैं। लगभग 4 हफ्तों तक इन्हें शहतूत की पत्तियां खिलाना पड़ता है। इसी बीच लारवे से प्यूपा बनने लगता है। जब यह प्यूपा बन रहा होता है तो रेशम कीट अपने चारों ओर रेशम का धागा बनाता है। रेशम का जो धागा बनता है वह एक संरचना में होता है इस रचना को कोकून कहते हैं। जब यह को कोकून पूर्ण रूप से विकसित हो जाते हैं और अच्छी तरह तैयार हो जाते हैं तो इन्हें गर्म पानी में डाला जाता है। इस प्रकार गर्म पानी में इन्हें डालकर कोकून से लगभग 600 से 900 मीटर लंबा रेशम का धागा प्राप्त किया जाता है। रेशम के धागे को आसानी से रंगा जा सकता है जिसके फलस्वरूप जो कपड़े तैयार होते हैं वह रंग-बिरंगे होते हैं।
