जलोद्भिद पौधे (Aquatic Plants) -:
ऐसे पौधे जो बहुत अधिक पानी वाले स्थानों में उगते हैं इन पौधों को जलोदभिद पौधा कहा जाता है। जलोदभिद पौधों का अर्थ होता है जलीय पौधे।
ये ऐसे पौधे होते हैं जो जल में उत्पन्न होते हैं अगर यह स्थल पर होती हैं तो इन्हें भरपूर मात्रा में पर्याप्त पानी की आवश्यकता होती है। इन पौधों के अंतर्गत हाइड्रिला, सिरेटोफाइलम व केला जैसे पौधे आते हैं।
जलोदभिद पौधों के अंतर्गत आने वाले सभी पौधे जल में ही उत्पन्न होते हैं। इन्हें भरपुर और पर्याप्त मात्रा में जल की आवश्यकता होती है। यह स्थल पर बहुत ही कम होते हैं। यह जल के अंदर सामान्य रूप से पाए जाते हैं।
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| हाइड्रिला का पौधा |
जलोदभिद पौधों का तना लंबा और काफी मुलायम होता है। इस पौधे के तने में लकड़ी का रेशा बिल्कुल नहीं पाया जाता है। इन पौधों की जड़ों उथली-पुथली होती हैं तथा इनकी पत्तियां पतली और लंबी होती हैं।
इनकी पत्तियां अक्सर फीतेनुमादार अवस्था में पाई जाती हैं जो कटी फटी भी हो सकती हैं। इन पौधों में वाष्प उत्सर्जन की समस्या नहीं होती है। हम जानते हैं कि यह जलीय पौधे हैं इसलिए जलीय पौधे होने के कारण इन पौधों में जड़ों का महत्व अधिक नहीं होता है तथा इनके तने लंबे, बेलनाकार, स्पंजी और काफी लचीले होने के साथ-साथ मुलायम भी होते हैं।
जलोदभिद पौधों के अंतर्गत कुछ पौधे ऐसे आते हैं जो जल में ही निवास करते हैं इनकी पत्तियां जल पर तैरती होती हैं तथा इनका आकार चपटा और बड़ा होता है।
जलोद्भिद पौधे के लक्षण/गुण (Properties of Aquatic Plants) -:
1. जलोदभिद पौधों का तना लंबा और मुलायम होता है।
2. इस पौधों में लकड़ी के रेशे नहीं होते अर्थात इनसे लकड़ी प्राप्त नहीं हो सकती है।
3. इन जलीय पौधों की पत्तियां कटी फटी भी होती हैं।
4. जक के अंदर निवास करने वाली कई पौधे ऐसे होते हैं जिनकी पत्तियां पानी पर तैरती भी रहती हैं।
5. जलोदभिद पौधों की पत्तियां पतली, लंबी और फितेनुमादर होती हैं।
